बेल जो हर तरह की बीमारी से बचाने में फायदेमंद होता है

बेल का फल गर्मी के मौसम में आने वाला फल होता है। बेल का सेवन गर्मी के मौसम करने से शरीर के अंदर ठंडक पहुँचती है। बेल का सर्वाधिक पेड़ भारत, थाईलैंड, श्रीलंका, एशिया के दक्षिणी भाग में पाया जाता है। बेल का पेड़ ४० फीट तक ऊंचा हो सकता है। बेल के अंदर का भाग भूरे रंग का गुदा और बाहरी कवच हरे रंग की कठोर सी होती है। बेल का लोग जेम बनाते है। बेल के अंदर छोटा सफेद बीज़ होता है जिसे हम कच्चा खाते है। बेल के अंदर टैनिक एसिड़, एक उड़नशील तेल पाया जाता है। बेल के बीज़ को सुखाकर पीसकर खाली पेट खाने से बहुत फायदेमंद करता है।

बुखार के लिए फायदेमंद

बुखार होने पर बेल का शरबद पीना चाहिए। बेल के पत्तों को पीस कर उसमे जीरा, लॉन्ग, सेंधा नमक डाल कर काढ़ा बनाकर पीने से बुखार और सूखी खांसी मिट जाती है। छोटे बच्चो को बुखार आने पर ४ बेल के पत्तो का रस निकालकर शहद में मिलाकर चाटने से बच्चों का बुखार समाप्त हो जाता है। बेल का रस लू लगने वाले रोगी को पिलाने से बहुत आराम दिलाता है।

मलेरिया के लिए फायदेमन्द

बेल की शाखाओ के अंदर टनीन नाम का तत्व उपस्थित होता है। जो मलेरिया के लिए फायदेमदं होता है। मलेरिया रोगी को बुखार आने पर बेल के गुदे की मालिश करनी चाहिए। बेल का गुदा सांप के डंक का इलाज करने में इस्तेमाल किया जाता है। बेल के जूस में नींबू का रस डालकर पीने से भी मलेरिया की बीमारी ठीक हो जाती है। बेल का बीया चबाने से मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।

मूत्र रोग में फायदेमंद

ज्यादा मूत्र होने पर बेल के पत्तो की चटनी बनाकर उसमे थोड़ी काली मिर्च का चूर्ण और शहद डालकर खाने से अधिकतम मूत्ररोग में आराम मिलता है। बेल के बीज़ का चूर्ण और कबाब चीनी समभाग पीस कर एक चम्मच की मात्रा एक कप दूध के साथ दिन में ४ बार लेने से भी मूत्र की बीमारी ठीक हो जाती है। बेल के गुदे को खाली पेट खाये।

बवासीर में फायदेमंद

अगर किसी मानव को बवासीर हुआ हो तो उसको बेल के ऊपरी हिस्से को पीसकर उसमे मिश्री को मिलाकर बासी मुँह ठन्डे पानी के साथ खाने से खूनी बवासीर बंद हो जाता है। रोगी को बवासीर के मस्सों में खास दर्द हो रहा हो तो बेल की जड़ो को तोड़कर उसका काढ़ा बनाकर गुनगुने काढ़े में रोगी को बैठाने से जल्दी ही दर्द दूर हो जाता है। कच्चे बेल के गूदे को सोंठ के चूर्ण के साथ दिन में ४ बार लेने पर बवासीर का दर्द ख़त्म हो जाता है। कब्ज के कारण बवासीर होता है जिसे ठीक करने के लिए बेल का शरबद पीना चाहिए।

अन्य फायदे

● बेल की पत्ती का रस फोड़े या फुंसी पर लगाने से ये जल्दी ठीक हो जाते है।
● बेल की पत्ती को चबाकर खाने से पेट की पेचिस जल्दी ठीक हो जाती है।
● कीड़ा काटने पर बेल के पत्तो का रस दिन में ४ बार लगाने से कीड़े का निशान और दर्द ठीक हो जाता है।
● बेल खाने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता जाता है।
● बेल दाँतो के मसूड़े को मजबूत बनाते है।
● बेल के कुछ पत्त्तो को गाय के मूत्र के साथ पीसकर उसमे तिलका तेल डाल कर उसको गर्म करके कानो में डालने से खुजली, सनसनाहट, दर्द आदि सब ख़त्म हो जाता है।
● रोजाना सुबह 10 मिलीलीटर बेल के पत्तों के रस को सेवन करना मधुमेह के रोगी के लिये हितकारी होता है।

नुक़सान

● छोटे बच्चे बेल का रस ज्यादा पीयेगे तो उनको दस्त होने लगता है।
● बेल का रस एब्रो में नहीं लगाना चाहिए क्योंकी एब्रो सफेद हो जाती है।
● ब्लड शुगर के रोगी को बेल का सेवन नहीं करना चाहिए।