अनार खाने के फायदे और औषधीय गुण

आयुर्वेद में तो इस फल को लगभग सौ बीमारियो की एक दवा मन गया है यह उल्लेखित पाया गया है, डॉक्टर ही नही घर के बुजूर्ग व अनार की खूबी को जानने वाला इंसान भी अनार के सेवन की सलाह देता है। जब कभी कोई व्यक्ति डॉक्टर के पास जाता है और कमजोरी, थकान, आलस जैसी समस्या को बताता है या फिर जिस किसी को भी रक्त की कमी होती रहती है तो डॉक्टर तुरन्त उनको अनार के सेवन का सलाह लगभग सबसे पहले देते है। अनार में एंटीऑक्सिडेंट, एंटीवायरल और अदभुत गुण है। अनार विटामिन का बहुत अच्छा स्रोत है। अनार को एक स्वास्थ्य शक्तिवर्धक फल भी कहा जाता है। अनार में वह सभी तत्व पाये जाते है जो स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक होता है।

हाई ब्लडप्रेशर में उपयोगी

अनार के छिलके में बहुत एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो कि हृदय की बीमारी से सुरछा करता है। साथ ही यह कोलेस्‍ट्रॉल के लेवल को भी कम करता है। १ चम्‍मच अनार के छिलके का पावडर ले कर गरम पानी में लिमाएं और रोजाना पियें। इसके साथ ही साथ अपने आहार में सुधार करें और रोजाना व्‍यायाम भी करें। यह धमनियों के सिकुड़ने को कम करता है। रोज़ अनार का रस पीने से बाईपास सर्जरी से बचा जा सकता है। अनार का रस उच्च रक्तचाप कम करता है।

दाँत और मसूढ़े में फायदेमंद

अनार तथा गुलाब के सूखे फूल, दोनों को पीसकर मंजन करने से मसूढ़ों से पानी आना बंद हो जाता है। केवल अनार की कलियों के चूर्ण का मंजन करने से मसूढ़ों से खून आना बंद हो जाता है। मुख और मसूढ़ों के विकार में अनार के जड़ के काढ़े से कुल्ले कराने से लाभ होता है। मीठे अनार के छाया में सूखे ९-१० पत्तों के चूर्ण के मंजन से दांतों का हिलना, मसूढ़ों से खून और पीव का आना या सूजन होना आदि दांतों के विकार नष्ट हो जाते हैं। एक गिलास पानी में सूखे छिलके का पावडर मिला लें। उसके बाद इस पानी से दिन में दो बार कुल्‍ला करे, इससे मुंह से बदबू नहीं आयेगी।

बवासीर में फायदेमंद

अनार के छालों का काढ़ा बनाकर उसमें सोंठ का चूर्ण मिलाकर पीने से बवासीर रोग ठीक होता है तथा खून का गिरना बंद होता है। अनार के पत्ते पीसकर टिकिया बना लें और इसे घी में भूनकर गुदा पर बांधें। इससे माँसपेशियों के जलन, दर्द तथा सूजन मिट जाते है। अनार के छिलकों का चूर्ण नागकेशर के साथ खाने से बवासीर में खून बंद हो जाता है। अनार के छिलके का चूर्ण बनाकर इसमें २०० ग्राम दही मिलाकर खाने से बवासीर ठीक हो जाती है।

पीलिया में फायदेमंद

छाया में सुखाए हुए अनार के पत्ते के महीन चूर्ण की ७ ग्राम मात्रा को सुबह गाय की छाछ के साथ सेवन करने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है। अच्छे अनार के २५ मिलीलीटर रस में १५ ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह-शाम देना चाहिए। इससे थोड़े दिनों में ही पीलिया ठीक हो जाता है। अनार खाने और रस पीने से शारीरिक कमजोरी नष्ट होती है। लगभग ३०० मिलीलीटर उत्तम अनार के रस में ७५० ग्राम चीनी मिलाकर चाशनी बना लें। इसका सेवन दिन में २ या ३ बार करने से पीलिया रोग दूर हो जाता है। और खून की कमी (एनीमिया) के रोग से मुक्ति मिलती है। अनार का रस मल बंध की शिकायत दूर करता है। सुबह लोहे का टुकड़ा अनार के रस में ५ घंटे तक डाल फिर उसे निकालकर, छानकर स्वादानुसार मिश्री और ३० मिलीलीटर पानी मिलाकर पी जायें। इससे पीलिया में लाभ होगा।

अन्य फायदे

१- अनार और उसका पाउडर आम तौर पर अपनी उच्च एंटीऑक्सिडेंट और पुनिकालागीन्स के लिए बहुत उपयोगी है।
२- अनार इम्यून सिस्टम को सुरक्षित रखता है।
३- बार बार पेसाब का होना या फिर पेसाब में जलन जैसे समस्याओ से आराम पाने के लिए भी अनार का सेवन फायदेमंद होता है।
४- बच्चों को दस्त या पेचिश की शिकायत होने पर अनार की छाल को घिसकर पिलाने से लाभ मिलता है।

नुक्सान

१- इंफ्लूएंजा, कब्ज से पीड़ित लोगो को अनार नहीं खाना चाहिए।
२- मानसिक समस्या होने पर अनार का सेवन नहीं करना चाहिए।
३- काले अनार खाने से पाचन तंत्र ख़राब हो जाता है।

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